राजस्थान Archives - Gaon Live News https://gaonlivenews.com/category/states/rj-news/ www.gaonlivenews.com Tue, 03 Mar 2026 14:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 रंगों की जगह राख, ढोल-नगाड़ों की गूंज श्मशान में: भीलवाड़ा की अनोखी होली देख हैरान रह जाएंगे https://gaonlivenews.com/ashes-instead-of-colors-the-echo-of-drums-and-cymbals-in-the-crematorium-youll-be-amazed-by-bhilwaras-unique-holi/ https://gaonlivenews.com/ashes-instead-of-colors-the-echo-of-drums-and-cymbals-in-the-crematorium-youll-be-amazed-by-bhilwaras-unique-holi/#respond Tue, 03 Mar 2026 14:16:00 +0000 https://gaonlivenews.com/436 भीलवाड़ा

जहां देशभर में धुलंडी पर रंग और गुलाल उड़ते हैं, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा में होली की एक अनोखी और दार्शनिक परंपरा निभाई जाती है। यहां रंगों से नहीं, बल्कि चिता की भस्म से होली खेली जाती है वह भी आधी रात को श्मशान में। पिछले 17 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब शहर की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

यह आयोजन शहर के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित प्राचीन मसानिया भैरवनाथ बाबा मंदिर में होता है। मान्यता है कि इसकी शुरुआत काशी के मणिकर्णिका घाट की तर्ज पर की गई थी, जहां जीवन और मृत्यु का दर्शन एक साथ होता है।

होलिका दहन की रात लगभग सवा 11 बजे बाबा भैरवनाथ की पालकी मंदिर से निकलती है। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और जयकारों के बीच शोभायात्रा पंचमुखी मोक्षधाम के श्मशान क्षेत्र की ओर बढ़ती है। करीब सवा 12 बजे पालकी चिता स्थल पर पहुंचती है, जहां कंडों की विशेष होली जलाई जाती है।

इसके बाद परिजनों की अनुमति से एकत्र की गई चिता की भस्म को गुलाल की तरह हवा में उड़ाया जाता है और श्रद्धालु बाबा भैरवनाथ के साथ भस्म की होली खेलते हैं। श्मशान की नीरवता के बीच जब “बोलो बाबा भैरवनाथ की जय” के जयकारे गूंजते हैं, तो वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। मंदिर के पुजारी रवि कुमार के अनुसार, “यह परंपरा भय उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि मृत्यु के भय को समाप्त करने के लिए है। राख हमें याद दिलाती है कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर। इसलिए यहां की होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भस्म की होली खेलने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं और मानसिक बल मिलता है। यही कारण है कि इस अनूठे आयोजन में शामिल होने के लिए लोग पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं। इस आयोजन में केवल भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। महिलाएं, बच्चे और युवा सभी श्रद्धा भाव से इसमें भाग लेते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, काशी के मणिकर्णिका घाट के बाद देश में भीलवाड़ा ऐसा दूसरा स्थान माना जाता है, जहां चिता भस्म से होली खेली जाती है। यही वजह है कि यह आयोजन अब धार्मिक पर्यटन का केंद्र भी बनता जा रहा है।

जहां ब्रज की लट्ठमार होली और राजस्थान की कोड़ा-मार होली प्रसिद्ध हैं, वहीं भीलवाड़ा की यह श्मशान होली अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां रंगों की चकाचौंध नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम सत्य का साक्षात्कार होता है। राख से सना शरीर और गूंजते जयकारे यह संदेश देते हैं कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के संतुलन का भी पर्व है।

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गरीबी में पला-बढ़ा बेटा बना IAS अफसर, पिता की मेहनत ने बदली किस्मत https://gaonlivenews.com/a-son-raised-in-poverty-became-an-ias-officer-his-fathers-hard-work-changed-his-fortune/ https://gaonlivenews.com/a-son-raised-in-poverty-became-an-ias-officer-his-fathers-hard-work-changed-his-fortune/#respond Mon, 02 Mar 2026 17:11:00 +0000 https://gaonlivenews.com/300 जयपुर
कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है। यह बात सच साबित करते हैं देशल दान चरण, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास की और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
देशल दान चरण मूल रूप से राजस्थान के सुमलाई गांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता कुशल दान चरण एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से दस लोगों का परिवार चलता था। घर की हालत ऐसी थी कि रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो गरीबी से बाहर निकाल सकता है।

पिता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत
देशल के पिता हमेशा कहते थे कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। घर में पैसों की कमी थी, लेकिन सपनों की नहीं। यही सोच बच्चों के अंदर भी बैठ गई। कम संसाधनों में पढ़ाई करना आसान नहीं था। न अच्छे कोचिंग संस्थान, न सुविधाएं, न पढ़ाई का माहौल। लेकिन देशल ने ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस रखा और हर परिस्थिति को चुनौती की तरह लिया।

परिवार पर टूटा बड़ा दुख, फिर भी नहीं डगमगाए
जब देशल दसवीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार पर एक बड़ा दुख आ पड़ा। उनके बड़े भाई, जो नौसेना में थे, एक पनडुब्बी दुर्घटना में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर का माहौल बदल गया। दुख, जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव सब एक साथ आ गए। लेकिन इसी समय देशल ने ठान लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को संभालने के लिए कुछ बड़ा करना है। उन्होंने इस दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया।

इंजीनियर बनने का सपना और पहली बड़ी सफलता
देशल का सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने जेईई मेन परीक्षा की तैयारी शुरू की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और पहले ही प्रयास में परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जबलपुर में दाखिला मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। गांव से निकलकर एक प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचना उनके संघर्ष का पहला फल था।

यहां से बदला सोचने का नजरिया
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान देशल ने महसूस किया कि वह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। यहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि अब लक्ष्य होगा देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में जाना। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा माना जाता है।

यूपीएससी की तैयारी, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा
यूपीएससी की तैयारी केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और लगातार मेहनत की मांग करती है। देशल ने बिना किसी शोर-शराबे के, बिना दिखावे के, चुपचाप तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी दिनचर्या सख्त बनाई। समय का पूरा उपयोग किया। कमजोर विषयों पर ज्यादा मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे। उनकी रणनीति साफ थी, कम संसाधन हैं तो मेहनत दोगुनी करनी होगी।

संघर्ष से निकली सफलता की कहानी
देशल दान चरण ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो एक चाय बेचने वाले का बेटा भी आईएएस बन सकता है। उनकी कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई पर रखा, और उस बेटे की जिसने उस विश्वास को सच कर दिखाया।

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तपता राजस्थान: तापमान में 3°C तक बढ़ोतरी के संकेत, रातों की गर्मी बनी चुनौती https://gaonlivenews.com/scorching-rajasthan-temperatures-indicate-a-rise-of-up-to-3c-night-heat-poses-a-challenge/ https://gaonlivenews.com/scorching-rajasthan-temperatures-indicate-a-rise-of-up-to-3c-night-heat-poses-a-challenge/#respond Mon, 02 Mar 2026 11:11:00 +0000 https://gaonlivenews.com/234 जयपुर

राजस्थान में तापमान लगातार बढ़ रहा है और अब दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म होने लगी हैं। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। बाड़मेर में रात का तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस समय के लिहाज से ज्यादा है।

पश्चिमी जिलों में तेज धूप के कारण लोग दिन के समय बाहर निकलने से बच रहे हैं। मौसम केंद्र मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य में अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा। साथ ही आने वाले दो से तीन दिनों में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और तेज होगा।

रविवार को पूरे प्रदेश में आसमान साफ रहा और सुबह से शाम तक तेज धूप देखने को मिली। पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा जोधपुर में 35.1, फतेहपुर (सीकर) में 35.5, जैसलमेर में 34.7, बीकानेर में 34.4, फलोदी में 34.6, चित्तौड़गढ़ में 34.6, करौली में 33.3, जालोर में 33.5, दौसा में 33.4, नागौर में 33.2, चूरू में 33.6, कोटा में 33.4, पिलानी में 33.7, वनस्थली में 33.6, भीलवाड़ा में 33 और जयपुर में 32.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। बाड़मेर के अलावा जवाई डैम (पाली) में 20.6, जैसलमेर में 20, जालोर में 20.7, फलोदी में 19.8, बीकानेर में 18.9, कोटा में 18.8 और जयपुर में 18 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। इन सभी स्थानों पर रात का तापमान सामान्य से 2 से 7 डिग्री अधिक रहा। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार होली के बाद प्रदेश में गर्मी और तेज होने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक वृद्धि हो सकती है, जिससे लोगों को और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा।

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गैस रिसाव से दहशत: दौसा में टैंकर दुर्घटना, जयपुर से पहुंची टीम ने संभाली स्थिति https://gaonlivenews.com/gas-leak-causes-panic-tanker-accident-in-dausa-jaipur-team-arrives-to-handle-the-situation/ https://gaonlivenews.com/gas-leak-causes-panic-tanker-accident-in-dausa-jaipur-team-arrives-to-handle-the-situation/#respond Mon, 02 Mar 2026 10:46:00 +0000 https://gaonlivenews.com/246 दौसा

दौसा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर बीती रात गैस से भरे टैंकर में रिसाव की सूचना से हड़कंप मच गया। घटना कैलाई बस स्टैंड के पास हुई, जब गुजरात से उत्तर प्रदेश जा रहा टैंकर कालाखोह के पास किसी अज्ञात वाहन से साइड में टकरा गया। टकराव से रोटो गेज वाल्व क्षतिग्रस्त हो गया और गैस रिसने लगी। चालक को इस रिसाव की जानकारी नहीं थी, लेकिन एक वाहन चालक ने कंट्रोल रूम को सूचना दी।

सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। सिकंदरा पुलिस ने टोल प्लाजा से पहले टैंकर को रोककर करीब 300 मीटर दूर कैलाई देवनारायण मंदिर के पास एक खेत में खड़ा करा दिया। उपखंड अधिकारी सिकराय नवनीत कुमार, नायब तहसीलदार डोण्ढीराम मीना, थाना प्रभारी अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी तैनात की गईं।
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जैविक और रासायनिक खतरे को देखते हुए जयपुर से सेफ्टी टेक्निकल टीम को बुलाया गया। टैंकर में करीब साढ़े 17 टन गैस भरी हुई थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त वाल्व को सुरक्षित रूप से बंद किया, जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। इसके बाद टैंकर को जयपुर स्थित आईओसी प्लांट ले जाकर गैस खाली कराई गई।

सेफ्टी अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि अज्ञात वाहन से टकराने के कारण वाल्व में लीकेज हुआ था, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। देर रात अफरा-तफरी के बीच प्रशासन की सतर्कता और तकनीकी टीम की तत्परता से सड़क मार्ग सुचारु रूप से चालू कर दिया गया। इस घटना में किसी प्रकार की हताहत की सूचना नहीं मिली।

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